सामान्य जानकारी

महिला एवं बाल विकास विभाग वित्तीय एवं भौतिक आकार में तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। यह बात विभाग के लिए वर्षवार प्रावधानित बजट से सिद्व होती है। वर्ष 2008-09 में विभाग का समग्र बजट प्रावधान जहां रुपये 926.37 करोड़ था, वहीं यह राशि 2012-13 में बढकर 3251.92 करोड़ हो गया है। आज कुल 453 परियोजनाएं संचालित है, जिनमें 80,160 आंगनबाड़ी केन्द्र और 12,070 उप आंगनबाडी केन्द्र स्वीकृत है। इन आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से 97.68 लाख हितग्राहियों को आईसीडीएस की सेवाओं से लाभान्वित किया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के हितग्राही समाज के कमजोर वर्ग, महिलाएं और बच्चे हैं, जिनके विकास व कल्याण का कार्य आसान एवं अल्प अवधि में पूरा होने वाला नहीं है। विभाग की कई योजनाओं का विस्तार हुआ हैं, वहीं लाडली लक्ष्मी योजना,अटल बाल मिशन, समेकित बाल संरक्षण योजना जैसी नई योजनाएं भी संचालित की जा रही है। गतिशील रहते हुए विभाग ने विकास के लिए प्रत्येक चुनौती को स्वीकार किया है। उपलब्धि के आंकड़ें बड़े नहीं है किन्तु समाज में महिलाओं की स्थिति में निरंतर सुधार हुआ है, महिलाओं में अपने अधिकारों व हितों के प्रति जागरुकता आई है, बच्चों के कुपोषण में कमी आई है।

किसी भी देश का विकास मानव विकास के बिना संभव ही नहीं है। विकास की इस नवीन अवधारणा के अनुसार ही आजकल विकास का मूल्यांकन मानव विकास सूचकांकांे के आधार पर किया जाने लगा है। इसी पैमाने को संयुक्त राष्ट्रसंघ, विश्व बंैक जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने भी अपनाया है।

इन सूचकांकों में शिशु मृत्यु दर, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (लाईफ एक्सपैक्टेन्सी एट बर्थ), साक्षरता दर और बच्चों का पोषण स्तर प्रमुख हैं। मध्यप्रदेश शासन भी इन कसौटियों पर खरा उतरने के लिए महिलाओं और बच्चों के विकास और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है जो कि प्रदेश की आबादी का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अटल बिहारी वाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन, लाड़ली लक्ष्मी योजना, आंगनबाडि़यों में मंगल दिवस कार्यक्रमों का आयोजन आदि इस दिशा में किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयास हैं। महिलाओं और बच्चों के विकास के क्षेत्र में प्रदेश शासन द्वारा किए गये प्रयासों को भारत सरकार द्वारा सराहा गया है। साथ ही अन्य राज्यों द्वारा इन प्रयासों को अपनाया भी गया है। इन प्रयासों से ही प्रदेश में भी मानव विकास सूचकांकों में सुधार दर्ज हो रहा है।